सिसौली में गूंजी बाबा टिकैत की विरासत: महेंद्र सिंह टिकैत की 91वीं जयंती पर उमड़ा किसान समाज, राकेश टिकैत ने निभाई श्रद्धा की परंपरा
किसान भवन सिसौली में अखंड पाठ साहिब के समापन पर अरदास, हवन और गुरु का अटूट लंगर; नरेश टिकैत, राकेश टिकैत समेत विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्रों के गणमान्य लोग हुए शामिल
कार्यक्रम विवरण एवं मुख्य बिंदु (Quick Facts)
सिसौली (मुजफ्फरनगर), 6 अक्टूबर 2026।
किसानों के मसीहा, भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक और देश के किसान आंदोलनों की बुलंद आवाज स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 91वीं जयंती पर आज भाकियू की राजधानी सिसौली स्थित किसान भवन श्रद्धा, सेवा और किसान एकजुटता का केंद्र बना रहा।
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती के अवसर पर 4 अक्टूबर से शुरू हुए तीन दिवसीय अखंड पाठ साहिब का आज विधिवत समापन हुआ। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में किसान, श्रद्धालु, भाकियू पदाधिकारी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग किसान भवन पहुंचे। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष मत्था टेककर सभी ने बाबा टिकैत को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान हवन, अरदास, कीर्तन तथा गुरु के अटूट लंगर का आयोजन किया गया।
राकेश टिकैत ने सिर पर धारण किया श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप
जयंती समारोह का सबसे भावपूर्ण दृश्य उस समय देखने को मिला जब भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को सिर पर धारण कर श्रद्धा की परंपरा निभाई।
सादगी, सेवा और सर्वधर्म सम्मान की यह परंपरा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की उस विरासत को दर्शाती है, जिसमें किसान को जाति, धर्म और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर रखकर उसके अधिकारों की लड़ाई को प्राथमिकता दी गई।
किसान भवन में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में संगत ने मत्था टेका और बाबा टिकैत की स्मृति को नमन किया। कार्यक्रम स्थल पर पूरे दिन श्रद्धा और सेवा का वातावरण बना रहा।
एक मंच पर दिखी अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती का यह आयोजन केवल भाकियू कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम में किसान आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के गणमान्य लोग भी पहुंचे।
कार्यक्रम में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, मंत्री नरेंद्र कश्यप तथा अनिल राजपाल सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। सभी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष शीश नवाया और किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह दृश्य अपने आप में महत्वपूर्ण रहा कि किसान भवन सिसौली में बाबा टिकैत की स्मृति के सामने अलग-अलग विचारधाराओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों से जुड़े लोग एक साथ नजर आए।
सिसौली क्यों है किसान आंदोलन की पहचान?
सिसौली सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि भारतीय किसान आंदोलन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
यही वह धरती है जहां चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों की समस्याओं को संगठित आवाज दी और भारतीय किसान यूनियन को मजबूत किसान संगठन के रूप में खड़ा किया। 1986 में संगठन के पुनर्गठन के बाद सिसौली देशभर के किसान आंदोलनों के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है।
बिजली की बढ़ी दरों, गन्ने के उचित मूल्य, सिंचाई, किसान कर्ज और किसानों के अधिकारों को लेकर बाबा टिकैत ने जिस संघर्ष की नींव रखी, उसने आगे चलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों तक किसान आंदोलनों को नई दिशा दी।
उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका किसान के प्रति समर्पण, सादगी और राजनीतिक दलों से संगठन की दूरी बनाए रखने का सिद्धांत था। उनकी इसी विरासत ने सिसौली को किसान राजनीति और किसान आंदोलनों की पहचान बना दिया।
बाबा टिकैत की विरासत आज भी जिंदा
आज बाबा महेंद्र सिंह टिकैत हमारे बीच भले ही मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा उठाए गए किसान हितों के सवाल आज भी देश के कृषि विमर्श के केंद्र में हैं।
किसान की फसल का उचित मूल्य, गन्ने का भुगतान, खेती की बढ़ती लागत, बिजली, पानी, कर्ज और किसान की आर्थिक मजबूती जैसे सवालों को लेकर भारतीय किसान यूनियन लगातार अपनी आवाज उठाती रही है।
सिसौली में हर वर्ष आयोजित होने वाला बाबा टिकैत का जयंती समारोह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि किसान समाज को उसकी संघर्षशील विरासत की याद दिलाने वाला दिन भी है।
आज किसान भवन में जुटी संगत और किसान समुदाय ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि—
“बाबा टिकैत एक व्यक्ति नहीं, किसानों की आवाज और संघर्ष की एक जीवंत विरासत हैं।”
सेवा, श्रद्धा और किसान एकता का संदेश
अखंड पाठ साहिब के समापन के बाद अरदास और गुरु के अटूट लंगर के साथ जयंती समारोह का धार्मिक पक्ष पूर्ण हुआ। दूर-दराज से पहुंचे किसानों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
सिसौली की धरती पर मनाई गई चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 91वीं जयंती ने एक बार फिर उनकी उस विरासत को सामने रखा, जिसने किसान को अपनी आवाज के लिए संगठित होना सिखाया।
किसान भवन सिसौली में बाबा टिकैत की स्मृति में उमड़ी यह श्रद्धा यही बताती है कि 15 वर्ष बाद भी किसानों के दिलों में उनकी आवाज, उनका संघर्ष और उनकी सादगी उसी मजबूती से जिंदा है।
सिसौली 91वीं जयंती समारोह — विशेष चित्र दीर्घा (Photo Gallery)
किसान भवन, सिसौली में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 91वीं जयंती पर अखंड पाठ साहिब, अरदास, लंगर और किसान समाज के श्रद्धापूर्ण पल:
"बाबा टिकैत की सबसे बड़ी शक्ति उनकी सादगी, निष्पक्षता और किसानों के अधिकारों के प्रति अटूट समर्पण था। सिसौली किसान भवन हमेशा किसानों की आवाज, उनके आत्मसम्मान और एकजुटता का अमर प्रतीक रहेगा। हम उनकी इस विरासत को कभी झुकने नहीं देंगे।"
चौधरी राकेश टिकैत राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (BKU)